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चारधाम में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर स्थिति साफ, सिख-जैन-बौद्धों को मिलेगी अनुमति

By: Neetu Bhati

On: Wednesday, January 28, 2026 7:37 AM

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देहरादून। उत्तराखंड के चारधाम—बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री—में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच मंदिर समितियों और बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। मंदिर समितियों के अनुसार चारधाम में हिंदुओं के साथ-साथ सिख, जैन और बौद्ध धर्म को मानने वाले श्रद्धालुओं को दर्शन की अनुमति होगी।

बीकेटीसी का स्पष्ट रुख

बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि केदारनाथ और बदरीनाथ धाम कोई पिकनिक स्थल नहीं हैं, बल्कि सनातन परंपरा के सर्वोच्च आध्यात्मिक केंद्र हैं। उन्होंने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत सिख, जैन और बौद्ध सनातन परंपरा के अंग माने गए हैं, जबकि अनुच्छेद 26 धार्मिक संस्थाओं को अपनी परंपराओं और पूजा-पद्धति की रक्षा का अधिकार देता है।

उन्होंने कहा,“यह निर्णय किसी के खिलाफ नहीं है। यह सदियों पुरानी आस्था, अनुशासन और शुद्धता की रक्षा के लिए है। उत्तराखंड में पर्यटन के हजारों स्थल खुले हैं, लेकिन धामों की धार्मिक पहचान से समझौता नहीं किया जा सकता।”

गंगोत्री मंदिर समिति की बात

गंगोत्री मंदिर समिति के अध्यक्ष सुरेश सेमवाल ने कहा कि हिंदुओं के अलावा सिख समाज के लोग भी दर्शन के लिए आ सकते हैं। जिन लोगों की हिंदू धर्म में आस्था है और जो उसका सम्मान करते हैं, वे धामों में दर्शन कर सकते हैं।

धार्मिक संस्थाओं ने किया समर्थन

गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध संबंधी प्रस्ताव का कई धार्मिक संस्थाओं ने स्वागत किया है। श्री केदार सभा, श्री डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत सहित अनेक सनातन धर्मावलंबी संगठनों ने समर्थन जताया। श्री गंगोत्री और श्री यमुनोत्री मंदिर समिति ने भी मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध का प्रस्ताव पारित कर दिया है।

पुरानी परंपरा, अब औपचारिक घोषणा

बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि यह कोई नया नियम नहीं है।“गैर-हिंदुओं का मंदिरों में प्रवेश पहले से ही प्रतिबंधित रहा है। अब केवल सदियों पुरानी परंपरा का औपचारिक ऐलान किया गया है। यह किसी धर्म के विरोध का मामला नहीं, बल्कि आस्था का प्रश्न है।”उन्होंने कहा कि जैसे मस्जिदों और चर्चों में भी अपने-अपने नियम होते हैं, वैसे ही हर धर्म को अपनी पवित्रता और अनुशासन तय करने का अधिकार है।

वक्फ बोर्ड अध्यक्ष का समर्थन

उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने भी इस फैसले को सही ठहराया है। उन्होंने कहा,
“जिनकी देवी-देवताओं पर आस्था नहीं है, उनका चारधाम में क्या काम है?”
उन्होंने यह भी कहा कि बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री सनातन आस्था के केंद्र हैं और सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए कड़े कदम जरूरी हैं।

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