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कैंची धाम यात्रा होगी और सुगम, 15 जून 2026 तक बाईपास होगा चालू,बैली ब्रिज बनाने की तैयारी

By: Neetu Bhati

On: Tuesday, February 10, 2026 8:43 AM

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भीमताल। विश्व प्रसिद्ध कैंची धाम की यात्रा को श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए सुगम बनाने की दिशा में सरकार ने प्रयास तेज कर दिए हैं। 15 जून 2026 तक कैंची धाम बाईपास को चालू करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि शिप्रा नदी पर प्रस्तावित 74 मीटर लंबे स्थायी पुल का निर्माण पर्यटन सीजन से पहले पूरा होना संभव नहीं दिख रहा है। ऐसे में लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) ने अस्थायी समाधान के तौर पर बैली ब्रिज बनाने का निर्णय लिया है।

तय समय पर काम और गुणवत्ता के निर्देश

सोमवार को भीमताल पहुंचे लोक निर्माण विभाग मंत्री सतपाल महाराज ने विकास भवन में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को योजनाओं को निर्धारित समय पर पूरा करने और गुणवत्ता बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कैंची धाम आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की यात्रा सरल, सुगम और सुरक्षित होनी चाहिए।

18.2 किलोमीटर लंबा है बाईपास

कैंची धाम बाईपास परियोजना की कुल लंबाई 18.2 किलोमीटर है। यह बाईपास भवाली सेनिटोरियम से शुरू होकर रातीघाट होते हुए पाडली तक बनाया जाना है। परियोजना के दो चरणों का कार्य पूरा किया जा चुका है।
दूसरे चरण में 10.22 किलोमीटर क्षेत्र में पहाड़ कटान का कार्य पूरा हो चुका है। अब पुल निर्माण और अन्य शेष कार्य किए जाने हैं।

बैली ब्रिज से मिलेगी अस्थायी राहत

लोनिवि मंत्री ने बताया कि यदि पर्यटन सीजन शुरू होने से पहले बैली ब्रिज का निर्माण पूरा हो जाता है, तो पर्वतीय क्षेत्रों की ओर जाने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। इससे कैंची धाम मार्ग पर लगने वाले लंबे जाम से भी निजात मिल सकेगी।

योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास

इस अवसर पर मंत्री सतपाल महाराज ने 1258.12 लाख रुपये की पांच योजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास भी किया। साथ ही उन्होंने स्थानीय लोगों से संवाद कर उनकी समस्याएं भी सुनीं।

15 जून को लगता है कैंची धाम मेला

गौरतलब है कि प्रत्येक वर्ष 15 जून को कैंची धाम में भव्य मेले का आयोजन किया जाता है। इस दिन विशाल भंडारा आयोजित होता है, जिसमें एक से दो लाख श्रद्धालु बाबा नीब करौरी महाराज के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
15 जून 1964 को बाबा नीब करौरी महाराज ने धाम की प्रतिष्ठा का दिन निर्धारित किया था। इसी दिन हनुमान जी सहित अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियों की प्राण-प्रतिष्ठा हुई थी।

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