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मदरसों के छात्र आएंगे शिक्षा की मुख्यधारा में, अब सरकारी नौकरी के लिए मान्य होंगे प्रमाण पत्र

By: Neetu Bhati

On: Friday, February 6, 2026 5:48 AM

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देहरादून। उत्तराखंड में मदरसों से शिक्षा ग्रहण करने वाले हजारों छात्र-छात्राओं के भविष्य से जुड़ा बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब तक मदरसों से पढ़े बच्चों के शैक्षिक प्रमाण पत्र सरकारी नौकरी के लिए मान्य नहीं होते थे, जिससे उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा था। अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के गठन के बाद यह स्थिति बदलने जा रही है।

प्रदेश में संचालित 452 मदरसों के हजारों बच्चे अब शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़ेंगे। इन मदरसों में उत्तराखंड बोर्ड का पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा, जिससे यहां से पढ़कर निकलने वाले छात्रों के प्रमाण पत्र सरकारी नौकरियों के लिए मान्य होंगे।

अब तक 43 हजार से ज्यादा छात्र हुए प्रभावित

प्रदेश के मदरसों से अब तक 43,186 से अधिक छात्र-छात्राएं मुंशी, मौलवी, आलिम (अरबी-फारसी), कामिल और फाजिल की शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं। लेकिन मुंशी, मौलवी और आलिम की डिग्रियों को उत्तराखंड बोर्ड की 10वीं और 12वीं के समकक्ष मान्यता नहीं मिली थी। यही कारण रहा कि हर साल हजारों छात्र शिक्षा पूरी करने के बावजूद सरकारी नौकरियों से वंचित रह जाते थे।

2016 से चल रहे थे प्रयास

हालांकि वर्ष 2016 में गठित उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड द्वारा लगातार यह प्रयास किया जा रहा था कि मदरसा बोर्ड को उत्तराखंड बोर्ड के समकक्ष मान्यता मिले। मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष मुफ्ती शमून कासमी के अनुसार, मान्यता न होने के कारण मदरसों में पढ़ने वाले छात्र अपने शैक्षिक प्रमाण पत्रों का उपयोग नहीं कर पा रहे थे, लेकिन अब उत्तराखंड बोर्ड से संबद्धता के बाद उनके प्रमाण पत्र मान्य होंगे।

बोर्ड से संबद्धता के लिए पूरे करने होंगे मानक

विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि उत्तराखंड बोर्ड से संबद्धता के लिए मदरसों को तय शैक्षिक मानकों को पूरा करना होगा।

  • जो मदरसे प्राथमिक स्तर की शिक्षा देंगे, उन्हें प्राथमिक शिक्षा के मानक पूरे करने होंगे।
  • वहीं माध्यमिक स्तर की शिक्षा देने वाले मदरसों को माध्यमिक शिक्षा के तय मानकों पर खरा उतरना होगा।

दोपहर तक सामान्य पढ़ाई, फिर धार्मिक शिक्षा

डॉ. पराग मधुकर धकाते के अनुसार, मदरसों में बच्चे दोपहर तक उत्तराखंड बोर्ड का पाठ्यक्रम पढ़ेंगे। इसके बाद उन्हें धार्मिक शिक्षा दी जाएगी। धार्मिक शिक्षा में क्या पढ़ाया जाएगा, इसका निर्धारण उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण करेगा।

सरकार के इस फैसले को मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए शिक्षा और रोजगार के नए अवसर खोलने वाला कदम माना जा रहा है।

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