देहरादून/हरिद्वार। उत्तराखंड सरकार हरिद्वार के कुंभ क्षेत्र में स्थित सभी धार्मिक स्थलों और गंगा घाटों पर गैर हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की दिशा में गंभीरता से विचार कर रही है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इस संबंध में कवायद शुरू हो चुकी है। प्रस्ताव के तहत हरिद्वार और ऋषिकेश के नगर निगम क्षेत्रों समेत पूरे कुंभ क्षेत्र को पवित्र सनातन नगरी घोषित किया जा सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, कुंभ क्षेत्र में आने वाले सभी धार्मिक स्थलों और कुल 105 गंगा घाटों पर गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाई जा सकती है। गौरतलब है कि हाल ही में हरिद्वार में हर की पौड़ी और आसपास के गंगा घाटों के प्रबंधन से जुड़ी श्री गंगा सभा ने इस संबंध में सरकार से औपचारिक मांग की थी।
इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी संकेत देते हुए कहा कि हरिद्वार, मां गंगा और साधु-संतों की तपोभूमि है और वहां से उठी मांग पर सरकार गंभीरता से विचार कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरिद्वार क्षेत्र की पवित्रता, देवत्व और धार्मिक मान्यताओं को बनाए रखने के लिए सभी पहलुओं का अध्ययन किया जा रहा है। साथ ही पुराने अधिनियमों और नियमों की भी समीक्षा की जा रही है।
श्री गंगा सभा की मांग
श्री गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम ने कहा कि कुंभ क्षेत्र को हिंदुओं की आस्था के कारण विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है, इसलिए इसे आधिकारिक तौर पर हिंदू क्षेत्र घोषित किया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि सभी धार्मिक स्थलों और गंगा घाटों पर गैर हिंदुओं का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाए, ताकि श्रद्धालु अपनी परंपराओं के अनुसार शांतिपूर्वक पूजा-पाठ और अनुष्ठान कर सकें।
गौतम ने वर्ष 1916 में बनाए गए हरिद्वार नगरपालिका के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि उस समय हर की पौड़ी के चारों ओर 7 से 8 किलोमीटर के क्षेत्र को गैर हिंदू प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किया गया था। कुंभ मेला क्षेत्र में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक की मांग को कुछ साधु-संतों का भी समर्थन मिला है।
कांग्रेस ने जताया विरोध
वहीं, कांग्रेस ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है। प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने इसे गंगा-जमुनी तहजीब के खिलाफ बताया और कहा कि इस तरह के फैसले समाज में विभाजन पैदा कर सकते हैं।




