देहरादून | देहरादून जिले में छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। जिले के पूरी तरह जर्जर हो चुके 79 स्कूल भवनों को ध्वस्त किया जाएगा। इनमें से 63 स्कूलों में वैकल्पिक शिक्षण व्यवस्था पूरी कर ली गई है, जिन्हें तत्काल प्रभाव से गिराया जाएगा, जबकि 16 स्कूलों में पहले वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के बाद ध्वस्तीकरण किया जाएगा।
1 करोड़ रुपये का बजट जारी
जिलाधिकारी सविन बंसल ने इस कार्य के लिए एक करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत कर दिया है। संबंधित विभागों से सात दिन के भीतर पूरा एस्टीमेट मांगा गया है। डीएम ने स्पष्ट किया कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी जोखिमपूर्ण भवन में पढ़ाई नहीं कराई जाएगी।
104 स्कूलों का हुआ सर्वे
शिक्षा विभाग द्वारा जिले के कुल 104 स्कूलों का सर्वे किया गया था ,जिसमें 79 स्कूल पूरी तरह जर्जर पाए गए, 17 स्कूल आंशिक रूप से जर्जर, जिनमें मरम्मत की आवश्यकता है और 8 स्कूल सुरक्षित, जिनमें ध्वस्तीकरण की जरूरत नहीं है।
वैकल्पिक व्यवस्था के बाद ही कार्रवाई
प्रशासन ने पहले ही शिक्षा विभाग को निर्देश दिए थे कि जर्जर स्कूलों में पढ़ रहे छात्रों के लिए वैकल्पिक शिक्षण व्यवस्था की जाए। जानकारी के अनुसार 63 स्कूलों में यह व्यवस्था पूरी हो चुकी है, इन्हें तुरंत ध्वस्त किया जाएगा । 16 स्कूलों में पहले वैकल्पिक व्यवस्था होगी , उसके बाद ध्वस्तीकरण होगा ।आंशिक रूप से जर्जर भवनों में सुरक्षा मानकों के अनुसार मरम्मत कराई जाएगी और जरूरत पड़ने पर कुछ हिस्सों को प्रतिबंधित किया जाएगा।
जिलाधिकारी का बयान
जिलाधिकारी सविन बंसल ने कहा,“बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। किसी भी विद्यालय में जोखिमपूर्ण भवनों में शिक्षण कार्य नहीं होगा। प्रशासन समयबद्ध, पारदर्शी और जवाबदेह तरीके से कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।”
ध्वस्त होने वाले स्कूल (स्तरवार)
माध्यमिक स्तर के विद्यालय – 06
प्रारंभिक स्तर के विद्यालय – 57
जिन स्कूलों में मरम्मत की आवश्यकता
राजकीय कन्या इंटर कॉलेज, कारगी
राजकीय इंटर कॉलेज, सौडा सरोली (रिलेक्सो कंपनी द्वारा मरम्मत)
राजकीय प्राथमिक विद्यालय, संघौर
राजकीय प्राथमिक विद्यालय, चिट्टाड़
राजकीय इंटर कॉलेज, दूधली
राजकीय उच्चतर प्राथमिक विद्यालय, नराया
राजकीय प्राथमिक विद्यालय, बंजारावाला
प्रशासन का कहना है कि पूरी प्रक्रिया की नियमित निगरानी की जाएगी ताकि छात्रों की पढ़ाई और सुरक्षा दोनों सुनिश्चित की जा सकें।





